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भूकम्प संभावित क्षेत्र में सुरिक्षत घर डिजाइन

भू-बनावट के कारण भारत के अलग अलग क्षेत्रों में अलग -अलग तीव्रता के भूकम्प की संभावना बनी रहती है | देश ने अतीत में कई विनाशकारी भूकम्प देखे हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जानें गयी और व्यापक पैमाने पर सम्पत्तियों का नुकसान हुआ | पिछली शताब्दी के दौरान 8 या 8 से अधिक तीव्रता के पांच भूकम्प देश के अलग–अलग भागों में आये | असम भूकम्प (1897), कांगड़ा भूकम्प (1905), बिहार-नेपाल भूकम्प (1934), अण्डमान - निकोबार भूकम्प (1941) एवं असम भूकम्प (1950) प्रभावित समुदाय को जीवन भर का कष्ट दे गये तथा इन्होंनें साथ ही साथ निजी एवं सार्वजनिक सम्पति के साथ आधारित संरचनाओं को भी भरी नुकसान पहुंचाया | हाल के वर्षो में विनाशकारी भूकम्प देश के विभिन्न भागो में अनुभव किये गये (तालिका संख्या 1) जैसे - असम (1988) 7.2 तीव्रता, बिहार - नेपाल (1988) 6.5 तीव्रता, उत्तरकाशी (1991) 6.6 तीव्रता, लातूर (1993) 6.4 तीव्रता, जबलपुर (1997) 6.0 तीव्रता, चमोली (1999) 6.8 तीव्रता और भुज (2001) 6.9 तीव्रता | भूकम्प की कुछ घटनाये (मुजफ़राबाद भूकम्प 2005 तीव्रता 7.6 एवं सुमात्रा भूकम्प 2004 तीव्रता 9.1) हालांकि भारतीय क्षेत्र के बाहर घटित हुई लेकिन इनका भी देश पर बहुत गंभीर प्रभाव पड़ा | तालिका - 1 पिछले 110 वर्षो में विभिन्न क्षेत्रों में आये भूकम्पों एवं उनकी तीव्रता के बारे में जानकारी देती है |

भूकम्प जोनिंग

भूकम्प की तीव्रता, आवृति एवं क्षति को देखते हुए देश को भूकम्प के नजरिये से विभिन्न भागों में बाटा गया है | इन जोनिंग मैप से भूकम्पीय गुणांक का संकेत मिलता है जिसे आम तौर पर देश के विभिन्न भागो में इमारतों की डिजाइन के लिये अपनाया जाता है | ये मानचित्र तीव्रता के व्यक्तिपरक अनुमान पर आधारित है जिसे भूकम्पीय घटना, भू-विज्ञान व देश की टेक्टोनिक स्थिति पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है | भारतीय भूकम्पीय जोनिंग एक सतत प्रक्रिया है जो भूकम्प की घटना पर अधिक से अधिक आंकड़े प्राप्त होने पर बदलती रहती है |

देश में भूकम्प के इतिहास को देखते हुए भूगर्भ विशेषज्ञो ने देश के लगभग 59% भू क्षेत्र को भूकम्प की संभावना के रूप में वर्गीकृत किया है | 11% अति उच्च जोखिम क्षेत्र 5, 18% उच्च क्षेत्र 4 एवं 30% मध्य जोखिम क्षेत्र 3 में वर्गीकृत हैं | गुवाहरी और श्रीनगर भूकम्प जोन 5 में स्थित हैं जबकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जोन 4 और मेगा सिटी मुम्बई, कोलकता और चेन्नई जोन 3 में स्थित हैं | देश के 38 शहर जिनकी आबादी 5 लाख से 10 लाख के बीच में है, भूकम्प के इन तीन क्षेत्रो में स्थित हैं |

भूकम्प अवरोधी निर्माण से सम्बंधित भारीतय मानकों की सूची इस प्रकार है:

  1. भारतीय मानक 1893 (भाग-1) : 2002 - संरचनाओं की भूकम्परोधी डिजाइन के लिये मानदण्ड : भाग 1 सामान्य प्रावधानों और भवनों के बारे में |
  2. भारतीय मानक 1893 (भाग-4): २००5 - संरचनाओं की भूकम्परोधी डिजाइन के लिये मानदण्ड : भाग-4 ढेर संरचनाओं सहित आद्योगिक ढांचे के बारे में |
  3. भारतीय मानक 4326: 1993 - भूकम्प अवरोधी डिजाइन एवं भवन निर्माण - व्यव्हार संहिता |
  4. भारतीय मानक 13827: 1993 - मिट्टी की इमारतों में भूकम्परोधी , सुधार एवं दिशा निर्देश |
  5. भारतीय मानक 13828: 1993 - कम शक्क्ति की चिनाई वाली इमारतों में भूकम्प अवरोधी सुधार एवं दिशा – निर्देश |
  6. भारतीय मानक 13920: 1993 - तन्य भूकम्पी बलों के आधीन प्रबलति कांक्रीट संरचनाओं का ब्यौरा - व्यव्हार संहिता |
  7. भारतीय मानक 13935: 1993 - बिल्ड़िंग की मरम्मत्त एवं भूकम्पीय मजबूती |

देश के विभिन्न भूकम्पीय क्षेत्रो में सुरक्षित घरों के निर्माण एवं रेट्रोफिटिंग के बारे में निम्नलिखित लिंक्स संक्षिप्त दिशा -निर्देश देने में उपयोगी हो सकेंगे

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