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Training@NIDM प्राकृतिक आपदा न्यूनीकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दशक की पृष्ठ भूमि मे सन 1995 में कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय जो देश में आपदा प्रबंधन के लिए नोडल मंत्रालय था, द्वारा भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के अंतर्गत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र की स्थापना की गई | केन्द्र द्वारा आपदा प्रबंधन विषय कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय से गृह मंत्रालय के अधीन हस्तानांतरित होने के पश्चात केंद्र को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के रूप में विकसित किया गया | 11 अगस्त 2004 को संस्थान का उदघाटन माननीय तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा किया गया |

संस्थान को आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अधीन संवैधानिक संगठन का दर्जा प्राप्त है | अधिनियम की धारा 42 की उपधारा 8, संस्थान को आपदा प्रबधन के क्षेत्र में योजना, प्रशिक्षण, अनुसन्धान एवं अभिलेखन को बढ़ावा देने एवं आपदा प्रबंधन के संबध में नीतियाँ बनाने, रोकथाम एवं शमन के उपायों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार बनाया गया है |

अधिनियम की धारा 42 की उपधारा 9, संस्थान को निम्नलिखित कार्य करने के लिए सौंपे गए हैं :-

(अ) प्रशिक्षण मॉडयूल विकसित करना, आपदा प्रबंधन क्षेत्र में अनुसन्धान एवं अभिलेखन कार्य एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना |
(ब) आपदा प्रबंधन के सभी पहलुओं पर व्यापक मानव संसाधन विकास योजना तैयार करना और उसे लागू करना |
(स) राष्ट्रीय स्तर की नीति बनाने में केंद्र सरकार को सहयोग करना |
(द) प्रशिक्षण एवं अनुसन्धान संस्थानों को, सरकारी कर्मचरियों एवं अन्य हितधारकों के लिए प्रशिक्षण एवं अनुसंधान कार्यक्रमों के विकास में सहयोग करना और राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थानों के संकाय सदस्यों को प्रशिक्षण देना |
(य) राज्य स्तर की नीतियों, रणनीतियों एवं आपदा प्रबंधन ढाँचे में राज्य सरकारों और राज्य प्रशिक्षण संस्थानो को सहायता करना | क्षमता निर्माण के लिए राज्य सरकारों या राज्य प्रशिक्षण संस्थानों का यथा अपेक्षित सहायता करना तथा उनके कर्मचारियों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों, कॉर्पोरेट सेक्टर और जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों सहित अन्य हितधारकों की क्षमता वृद्धि करना |
(र) आपदा प्रबंधन के लिए शैक्षिक एवं पेशेवर पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षिक समाग्री तैयार करना |
(ल) महाविधालयों या विधालयों के शिक्षकों, छात्रों, तकनीकी कर्मियों एवं अन्य व्यक्तियों सहित अन्य हितधारकों के बीच बहु विपदा शमन, तैयारी एवं बचाव के उपायों पर जागरूकता पैदा करना |
(व्) उद्देश्यों को पूरा करने के लिए देश के भीतर या देश के बाहर अध्ययन पाठ्यक्रम, सम्मेलन, व्याख्यान का आयोजन करना और उन्हें सुविधा जनक बनाना |
(श) पत्रिकाओं, शोध ग्रंथों और पुस्तकों का प्रकाशन करना और पूर्वोक्त उद्देश्यों को अग्रसर करने के लिए पुस्तकालयों की स्थापना करना और उनका अनुरक्षण करना |
(ष) ऎसे सभी अन्य विधिपूर्ण कार्य करना जो उपरोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक हों |
(स) ऐसे अन्य कार्य करना जो केंद्रीय सरकार द्वारा समुदेशित किये जाएँ |
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